Question:

‘मनुष्यता’ कविता के आधार पर लिखिए कि ‘अखंड आत्म भाव’ रखने के क्या लाभ हैं?

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अखंड आत्म भाव अर्थात सब में एक ही आत्मा देखना। पहले सोचिए कि इस भाव के बिना समाज में क्या बिगड़ता है, उसका उलटा ही इसका लाभ है।
Updated On: Sep 15, 2026
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Solution and Explanation

Concept:
  • ‘मनुष्यता’ कविता मैथिलीशरण गुप्त की है, जिसमें कवि सारी मानव जाति को एक मानने का संदेश देता है।
  • ‘अखंड आत्म भाव’ का अर्थ है यह अनुभव करना कि सब में एक ही आत्मा है, कोई पराया नहीं।

Step 1: पहला लाभ, भेदभाव समाप्त होता है।
जब मनुष्य सबमें एक ही आत्मा देखता है, तो जाति, धर्म, रंग और ऊँच-नीच का भेद अपने आप मिट जाता है। कोई अपना-पराया नहीं रह जाता।

Step 2: दूसरा लाभ, परस्पर सहानुभूति और सहयोग बढ़ता है।
दूसरे का दुख अपना दुख लगने लगता है, इसलिए मनुष्य स्वयं आगे बढ़कर सहायता करता है। कवि इसीलिए कहता है कि सबको साथ लेकर चलो, अकेले बढ़ने में कोई गौरव नहीं।

Step 3: तीसरा लाभ, समाज में एकता और प्रेम फैलता है।
आपसी बैर और स्वार्थ समाप्त होकर बंधुत्व का भाव जागता है। पूरा समाज एक परिवार की तरह जुड़ जाता है।

Step 4: चौथा लाभ, जीवन सार्थक हो जाता है।
कवि के अनुसार सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए जिए और मरे। अखंड आत्म भाव रखने वाला व्यक्ति परोपकार करता है, इसलिए मृत्यु के बाद भी लोग उसे याद रखते हैं।

Final Answer: अखंड आत्म भाव रखने से जाति, धर्म और ऊँच-नीच का भेद मिट जाता है, मनुष्य में परस्पर सहानुभूति और सहयोग जागता है, समाज में एकता तथा प्रेम बढ़ता है, और परोपकार के कारण जीवन सार्थक बन जाता है।
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