Concept:
- ‘आत्म त्राण’ रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता है, जिसका अर्थ है स्वयं की रक्षा।
- इसमें कवि ईश्वर से संकट हरने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि संकट से जूझने का बल माँगता है।
Step 1: कवि की मूल प्रार्थना समझिए।
कवि कहता है कि वह यह नहीं चाहता कि ईश्वर उसकी विपदाएँ दूर कर दें। वह केवल इतना चाहता है कि विपदा में वह
भयभीत न हो और उसे सहने की शक्ति मिले।
Step 2: अपनों के साथ न देने की स्थिति देखिए।
कवि कहता है कि यदि दुख की रात में सारा संसार उसे छोड़ दे और कोई सहायक न रहे, तो भी उसका विश्वास डिगे नहीं।
वह चाहता है कि ऐसी स्थिति में भी वह अपने ऊपर संदेह न करे।
Step 3: छले जाने की स्थिति देखिए।
यदि अपने ही लोग उसे धोखा दें और हानि पहुँचाएँ, तो भी वह चाहता है कि उसके मन में उनके प्रति कटुता न आए। वह किसी पर दोष न मढ़े और अपना संयम बनाए रखे।
Step 4: संकट से सामना करने का उसका ढंग बताइए।
कवि संकट का सामना
अपने ही बल पर, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ करना चाहता है। वह चाहता है कि सुख के दिनों में जैसे वह ईश्वर को स्मरण करता है, वैसे ही दुख की रात में भी उसका सिर झुके नहीं और वह ईश्वर पर संदेह न करे।
Final Answer: कवि संकट से बचना नहीं चाहता, बल्कि उसे स्वयं अपने बल पर सहना चाहता है। अपनों के छोड़ देने और छल करने पर भी वह चाहता है कि उसका विश्वास न डिगे, मन में कटुता न आए, और वह धैर्य तथा आत्मविश्वास के साथ बिना सिर झुकाए संकट का सामना करे।