Question:

'सूरदास’ किस भक्तिकालीन धारा के कवि थे? 
 

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सूरदास जी के नाम और रचनाओं में कृष्ण भक्ति समाहित है। याद रखें: सूरदास = सूरसागर = कृष्ण लीला। वे अष्टछाप के कवियों में सबसे प्रमुख माने जाते हैं।
Updated On: May 21, 2026
  • निर्गुण ज्ञानमार्गी
  • निर्गुण प्रेममार्गी
  • सगुण रामभक्ति
  • सगुण कृष्णभक्ति
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The Correct Option is D

Solution and Explanation


Step 1: Understanding the Concept:

हिंदी साहित्य के 'भक्तिकाल' (स्वर्णकाल) को दो मुख्य धाराओं में विभाजित किया गया है - निर्गुण धारा (निराकार ईश्वर की पूजा) और सगुण धारा (साकार या रूपवान ईश्वर की पूजा)। सगुण धारा को आगे चलकर दो शाखाओं में बांटा गया: रामभक्ति शाखा और कृष्णभक्ति शाखा। महाकवि सूरदास सगुण विचारधारा के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक थे।

Step 2: Detailed Explanation:

आइए भक्तिकाल की धाराओं और उनके प्रमुख कवियों को समझते हैं: निर्गुण ज्ञानमार्गी शाखा: इसके प्रमुख कवि कबीरदास थे, जिन्होंने ज्ञान को प्रधानता दी। निर्गुण प्रेममार्गी शाखा: इसके प्रमुख कवि मलिक मोहम्मद जायसी थे, जिन्होंने सूफी प्रेमकाव्य लिखे। सगुण रामभक्ति शाखा: इसके प्रमुख कवि गोस्वामी तुलसीदास थे, जिन्होंने 'रामचरितमानस' की रचना की। सगुण कृष्णभक्ति शाखा (Correct): महाकवि सूरदास इस शाखा के सर्वोच्च कवि हैं। उन्होंने ब्रजभाषा में 'सूरसागर', 'सूरसारावली' और 'साहित्य लहरी' की रचना कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और वात्सल्य रस का अत्यंत सजीव वर्णन किया है। उन्हें 'पुष्टिमार्ग का जहाज' और 'वात्सल्य रस का सम्राट' भी कहा जाता है।

Step 3: Final Answer:

महाकवि सूरदास भक्तिकाल की 'सगुण कृष्णभक्ति' धारा के कवि थे।
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