Concept:
- यह वर्णनात्मक अनुच्छेद है, इसलिए इसमें तर्क नहीं, दृश्य चित्रित करना है।
- अच्छा वर्णन वह है जिसमें आँख, कान और स्पर्श तीनों का अनुभव आए, जिससे पाठक को लगे कि वह स्वयं वहाँ खड़ा है।
Step 1: पहला संकेत बिंदु, चारों तरफ की गरमागरमी।
भीड़ का धक्का-मुक्की भरा माहौल, तेज चलते लोग, मोल-भाव करते ग्राहक और कहीं-कहीं होती छोटी-मोटी बहस।
Step 2: दूसरा संकेत बिंदु, दुकानदारों की आवाज।
हर दुकानदार अपनी वस्तु की प्रशंसा करता हुआ पुकार रहा है, कोई सस्ते दाम बता रहा है तो कोई गुणवत्ता की गारंटी दे रहा है।
Step 3: तीसरा संकेत बिंदु, खरीद-फरोख़्त करते लोग।
कोई कपड़े देख रहा है, कोई सब्जी तौलवा रहा है, कोई बच्चे के लिए खिलौना मोल कर रहा है। थैले भरे हाथ और थके चेहरे भी दिखाई देते हैं।
Step 4: अंत में समग्र प्रभाव लिखिए।
अंत में एक-दो पंक्ति में यह बताइए कि यह दृश्य कैसा लगा और उससे क्या अनुभव हुआ।
Final Answer:
भीड़ भरे बाज़ार का दृश्य
त्योहार निकट था, इसलिए बाज़ार खचाखच भरा हुआ था। चारों तरफ लोगों की गरमागरमी थी। कहीं धक्का-मुक्की हो रही थी तो कहीं दाम को लेकर तीखी बहस चल रही थी। पैर रखने तक की जगह नहीं थी और आगे बढ़ने के लिए भीड़ को चीरना पड़ रहा था। दुकानदार ऊँची आवाज में ग्राहकों को पुकार रहे थे। कोई कह रहा था कि यहाँ सबसे सस्ता माल है तो कोई अपनी वस्तु की गुणवत्ता की गारंटी दे रहा था। इन आवाजों में रेहड़ी वालों की पुकार भी घुली हुई थी। लोग जमकर खरीद-फरोख़्त कर रहे थे। कोई कपड़े उलट-पलटकर देख रहा था, कोई सब्जी तौलवा रहा था और कोई बच्चे के लिए खिलौने का मोल कर रहा था। थैलों से लदे हाथ और थके किंतु संतुष्ट चेहरे सर्वत्र दिखाई दे रहे थे। यह दृश्य जीवन की धड़कन का सच्चा चित्र लगा।