Step 1: Understanding the Concept:
स्तूप एक अर्ध-गोलाकार संरचना है जिसका उद्भव बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए हुआ था। वहीं, कबीर मध्यकालीन भारत के महान रहस्यवादी संत थे जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई।
Step 2: Detailed Explanation:
स्तूप की संरचना:
1. अण्ड: यह एक अर्ध-वृत्ताकार मिट्टी का टीला होता है।
2. हर्मिका: अण्ड के ऊपर एक चौकोर संरचना होती है जो देवताओं के निवास का प्रतीक है।
3. यष्टि और छत्रावली: हर्मिका से एक मस्तूल (यष्टि) निकलता है जिस पर तीन छतरियाँ लगी होती हैं।
4. वेदिका और तोरण: स्तूप के चारों ओर घेरा (वेदिका) और प्रवेश द्वार (तोरण) होते हैं, जो अक्सर सुंदर नक्काशी से सजे होते हैं।
अथवा (कबीर की शिक्षाएँ):
- एकेश्वरवाद: कबीर ने ईश्वर की एकता पर बल दिया। उन्होंने उसे 'राम', 'रहीम', 'अल्लाह' और 'हरि' जैसे विभिन्न नामों से पुकारा।
- मूर्ति पूजा का विरोध: वे बाहरी आडंबरों और मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी थे।
- समानता: उन्होंने जाति-पाँति और ऊँच-नीच के भेदभाव को सिरे से नकारा।
- भाषा: उनकी शिक्षाएँ 'साखी' और 'सबद' के रूप में 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित हैं।
Step 3: Final Answer:
स्तूप बुद्ध की पवित्रता का प्रतीक है जिसकी संरचना में अण्ड, हर्मिका और तोरण मुख्य हैं। कबीर ने प्रेम, समानता और निराकार ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया।