निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'पेड़ होने का अर्थ' कविता का रसास्वादन कीजिए:
• (१) रचनाकर का नाम
• (२) पसंद की पंक्तियाँ
• (३) पसंद आने के कारण
• (४) कविता की केंद्रीय कल्पना

निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत रस पहचानकर उनके नाम लिखिए (कोई दो):
(1) सुकुकु-सुकुकु नास से पित्त (मवाद) निकल रहा है,
नाकिका से स्रवण पदार्थ निकल रहा है।
(2) राम के रूप निहारति जानकी, कंकन के मन की परछाई।
यामिनी बैरु भुली गई, कर टेंकति ऐर तारता नाही।।
(3) माला फेरत जुग गया, मन न फिरतो फेर।
कर का मनका फेर दे, मन का मनका फेर।।
(4) तू दयालु दीन बंधु, तू तारन के अधिकारी।
हिं प्रबल दुःख पातकी, तू प्रभु पुकारारी।।
निम्नलिखित पंक्तियों में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए (कोई दो):
(1) प्यारे जी मैंने राम रतन धन पायो।
(2) राधा-बदन चंद सो सुंदर।
(3) चढ़ी अनंगन नंदि अंबार।
भूड़ा उतरै कैसे पार।।
राणा ने सोचा इह पार।
तब तक पेखत झा उस पार।।
(4) एक प्राण में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पिया का, नारी नहीं रह सकती है।
निम्नलिखित वाक्यों का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए (कोई दो):
(1) वैद्य का लहू सूख गया है। (सामान्य भूतकाल)
(2) सत्य का मार्ग सरल है। (सामान्य भविष्यकाल)
(3) हमारे भू-मंडल में हवा और पानी बुरी तरह प्रदूषित हुए हैं। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
(4) मैं वहाँ जाकर मौसी को देख अति दुखी हो गया। (पूर्ण भूतकाल)
निम्नलिखित में से किन्हीं चार के पारिभाषिक शब्द लिखिए:
(1) Judge
(2) Warning
(3) Balance
(4) Payment
(5) Speed
(6) Antiseptics
(7) Output
(8) Auxiliary Memory
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
गद्यांश:
एक बार इंग्लैंड के प्रसिद्ध साहित्यसेवी डॉ॰ जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस ज़ाहिर करते लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।
"क्यों?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा।
"आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।"
"पर यह बात अब की तो फिर लीजिए है।" डॉ॰ जॉनसन ने कहा।
"और करीब आठ घंटे ऑफिस के काम करने पड़ते हैं।"
"और बाकी आठ घंटे?" डॉ॰ जॉनसन ने पूछा।
"वह तो खाने, पीने, कपड़े बदलने, नहाने-धोने, ऑफिस आने-जाने, मित्रों से मिलने-जुलने, किताबें पढ़ने तथा घरेलू कामों में व्यतीत हो जाते हैं।"
"तब तो मुझे भी तुम्हारा मतलब समझ में आ गया," डॉ॰ जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।
"क्यों? क्या?" मित्र ने पूछा।
"यदि किसी व्यक्ति का सोना, खाना, पीना, नहाना, धोना, और अपने अनुभवों के लिए दुनिया में एक जीवन ही हो पाए, तो जानिए, वह व्यक्ति चौबीस घंटे नहीं, बल्कि सत्तर या अस्सी करोड़ लोगों जैसे अपना पेट भर सकता है।"
"क्या कहा आपने?"
"मैंने कहा कि संसार में करोड़ों लोग हैं जो मेहनत करते हुए भी अपने जीवन में समय नहीं निकाल पाते।"
यह सुनकर मित्र निरुत्तर रह गया। डॉ॰ जॉनसन ने कहा, "एक बार नज़र डालिए — खेतों में किसान हैं, उबल-उबल कर भोजन बनाने वाले, नदी-नालों में रेंगते लोग हैं, कारख़ानों में काम करने वाले मजदूर हैं। यही सच्चे लोग हैं, जो परिश्रम और श्रम की पूजा करते हैं। इन्हीं के श्रम से संसार चलता है। दुनिया में करोड़ों लोग हर दिन आते हैं और उन्हें श्रम मिलता ही नहीं।"
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबाणी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
(v) आम आदमी की पीड़ा को समझते हुए 'गुरिंदर शेर' कविता का रसास्वादन कीजिए।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबाणी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
(iv) कविता की केन्द्रीय कल्पना लिखिए।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबाणी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
(iii) कविता के पसंद आने के कारण लिखिए।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबाणी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
(ii) पसंद की पंक्तियाँ लिखिए।
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबाणी' कविता का रसास्वादन कीजिए:
(i) रचनाकार का नाम